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गोवा की तर्ज पर प्रदेश में भी मई से किराए पर मिल सकेगी बाइक
उज्जैन । गोवा की तर्ज पर भोपाल समेत प्रदेश में भी लोगों को किराए पर बाइक मिल सकेगी। परिवहन विभाग द्वारा मई से यह सुविधा मिल सकेगी। व्यवस्था को पूरी तरह से आईटी बेस्ड रखा जाएगा, जिससे बाइक किराए पर लेने वाले पर नजर रखी जा सके और उसका दुरुपयोग न हो। गृह व परिवहन मंत्री भूपेंद्र सिंह का कहना है कि विभागीय अधिकारी नियम तैयार कर रहे हैं, जल्द उनका परीक्षण कर व्यवस्था को शुरू कर दिया जाएगा।
सिंहस्थ के दौरान पिछले साल उज्जैन में किराए पर बाइक देने की योजना की सफलता के बाद प्रदेश के सभी बड़े शहरों में यह व्यवस्था लागू की जा रही है। ट्रांसपोर्ट कमिश्नर डॉ. शैलेंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि जो भी कंपनी इस सेवा को शुरू करना चाहेगा, उसे नियमों का पालन करते हुए विभागीय फीस जमा कराना होगी।
वैध बीमा और पीयूसी होगा जरूरी..
किराए पर दी जाने वाली बाइक का वैध बीमा, रजिस्ट्रेशन नंबर, पीयूसी जरूरी होगा। जिन गाड़ियों को इस योजना के तहत इस्तेमाल किया जाएगा, उनका फिटनेस संबंधित आरटीओ में करवाया जाएगा। इसके बाद ही उन्हें किराए पर चलाया जा सकेगा।
वेब पोर्टल और एप दोनों : बाइक किराए पर देने वाली कंपनी को वेब पोर्टल और मोबाइल एप के माध्यम से भी आम लोगों को इसकी उपलब्धता करवाना होगी।
पैनिक बटन रहेगा : किराए पर दी जाने वाली बाइक में पैनिक बटन भी लगाए जाएंगे। इस बटन को ऐसे स्थान पर लगाना होगा, जहां आसानी से उसे दबाकर मदद ली जा सके। साथ ही वाहन पर आरटीओ, पुलिस सहित हेल्प लाइन नंबर भी डिस्प्ले किए जाएंगे।
एक्ट के तहत देना होगी रसीद : इन नियमों को मोटर व्हीकल एक्ट, 1988 और वर्ष-2000 के इन्फर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट को समाहित करते हुए लागू किया जाएगा। यानी किसी कंपनी विशेष द्वारा संचालित किराए के वाहन में सफर करने वाले यात्री को, संबंधित कंपनी प्रिंटेड रसीद मुहैया करवाएगी। यह रसीद ई-मेल या मोबाइल पर या फिजिकल फॉर्म में देना होगी।
लाइसेंस दो साल के लिए : कंपनी के संचालक को पहली बार में दो साल के लिए लाइसेंस दिया जाएगा। इसके बाद उसे निर्धारित फीस चुका कर लाइसेंस रिन्यू करवाना होगा।
आरटीए तय करेगी किराया : कंपनी संचालित बाइक का किराया निर्धारित करने के अधिकार रीजनल ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (आरटीए) को होंगे। इसका आशय यह है कि कम से कम डिप्टी ट्रांसपोर्ट कमिश्नर स्तर का अधिकारी ही इनका किराया तय कर सकेगा। वर्तमान में आरटीओ के पास यह अधिकार है।